उत्तर प्रदेश :
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (ज्योतिष पीठ के तथाकथित शंकराचार्य) पर नाबालिग लड़कों से यौन शोषण (दुराचार) के गंभीर आरोप लगे हैं। यह आरोप प्रयागराज के उनके शिविर/आश्रम से जुड़े बताए जा रहे हैं, जहां गुरुकुल की आड़ में बच्चों के साथ कथित यौन उत्पीड़न का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (शाकुंभरी पीठाधीश्वर और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने 8 फरवरी 2026 को प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया कि माघ मेले के दौरान एक नाबालिग और एक बालिग बच्चे उनके पास आए थे, जिन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों पर एक साल से अधिक समय तक दुराचार करने का आरोप लगाया है। आशुतोष ने 20 नाबालिगों के नाम का जिक्र भी किया।
कोर्ट का फैसला: प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत ने हाल ही में (फरवरी 2026 में) पुलिस को इन आरोपों की जांच कराने और अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तथा उनके 4-5 शिष्यों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह FIR झूसी थाने में दर्ज की जाएगी।
कोर्ट ने सीधे FIR का आदेश देने के साथ-साथ पुलिस कमिश्नर से आरोपों की प्रारंभिक जांच भी करवाई थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने तर्क रखे, और फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन अब FIR दर्ज करने का निर्देश जारी हो चुका है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए एडीजे रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने बड़ा आदेश देने के साथ साथ अदालत ने झूंसी थाना पुलिस को भी आदेश दिया है कि वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की गहन जांच करें।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज तक पालकी में ही जाने की जिद करके हंगामा खड़ा करने और फिर कई दिन तक मीडिया के जरिए योगी आदित्यनाथ को औरंगजेब और पता नहीं क्या क्या अपशब्द बोलते रहे जिससे अब उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही है एवं उनके इस प्रकार के अनर्गल बयान मीडिया में देने से उनकी साख को भी धक्का पहुंचा है तथा कोर्ट के आदेश के बाद और यौन शोषण का आरोप लगने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है, उन्होंने आरोपों से साफ-साफ इनकार किया है और जोर देकर कहा कि कोर्ट इस मामले में लंबा समय न लगाए।
इस दौरान उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि हम योगी आदित्यनाथ थोड़ी हूं जो कि अपने ऊपर लगा मुकदमा हटवा लूं , जो कि यह सब फर्जी केस बनाया गया है और उसे तो फर्जी सिद्ध होना ही है। अविमुक्तेश्वरानंद ने केस दाखिल करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि शामली के हिस्ट्रीशीटरों की लिस्ट में उनका नाम 34वें नंबर पर दर्ज है जो झूठे मुकदमे दर्ज कराकर उगाही करना उनका काम है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज की स्पेशल कोर्ट में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाते हुए अर्जी दाखिल की है और अविमुक्तेश्वरानंद यहीं नहीं रुके बल्कि अपने बयान से रामभद्राचार्य की भी जमकर आलोचना किया जिससे उनके प्रति संत समाज में भरी नाराजगी उभरकर दिखाई दे रही है तथा सभी संतो का कहना है कि अविमुक्तेश्वरानंद के अनर्गल बयानों से उनकी ही नहीं बल्कि सनातन धर्म का सबसे पवित्र शंकराचार्य पीठ भी बदनाम हो रहा है। अब लोग अविमुक्तेश्वरानंद को लोग शंकराचार्य नहीं बल्कि सियासाचार्य कह रहे हैं क्योंकि अविमुक्तेश्वरानंद को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की तरफ से भरपूर समर्थन मिल रहा है।
कोर्ट और उत्तर प्रदेश के सरकार के कड़क रूख को देखते हुए ऐसा लग रहा है की अविमुक्तेश्वरानंद का पालकी में बैठने का शौक उन्हें आनेवाले दिनों बहुत भरी पड़ सकता है।
केस मिस्ट्री:
आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज पुलिस में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें गुरुकुल में लड़कों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया।
शिकायत प्रयागराज स्पेशल POCSO कोर्ट में भेजी गई। आरोपों में ~20 नाबालिगों का शोषण शामिल है।
अविमुक्तेश्वरानंद की टीम ने इसे एक साज़िश बताया।
कोर्ट ने दो नाबालिग लड़कों के वीडियो वाले बयान रिकॉर्ड किए। शिकायत करने वाले ने CD "सबूत" जमा किया।
जज विनोद कुमार चौरसिया ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने और शोषण और आय से ज़्यादा संपत्ति दोनों की जांच करने का आदेश दिया।